भावांतर योजना के पहले दिन हंगामा: मॉडल रेट घोषित करने की मांग पर किसानों ने मंडी गेट पर लगाया ताला

bhavantar-yojana

राजगढ़ ।प्रदेशभर की मंडियों में शुक्रवार से भावांतर (bhavantar-yojana) भुगतान योजना के तहत कृषि उपज की खरीदी प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन पहले ही दिन योजना को लेकर किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। राजगढ़ कृषि उपज मंडी में किसानों ने मॉडल रेट घोषित न होने पर हंगामा कर दिया। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मंडी में नीलामी प्रक्रिया रुकवा दी और गेट पर ताला जड़ दिया। करीब एक घंटे तक मंडी परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।


किसान यूनियन के नेतृत्व में (bhavantar-yojana)विरोध प्रदर्शन

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राकेश सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान शुक्रवार सुबह मंडी पहुंचे। किसानों का आरोप था कि शासन ने योजना शुरू कर दी, लेकिन मॉडल रेट घोषित किए बिना खरीदी प्रारंभ कर दी गई, जिससे उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा।

“जब तक मॉडल रेट तय नहीं होगा, तब तक खरीदी प्रक्रिया शुरू करना किसानों के साथ अन्याय है,” — राकेश सोलंकी, जिलाध्यक्ष, किसान यूनियन।

किसानों ने मंडी प्रशासन से तत्काल रेट घोषित करने की मांग की और मंडी परिसर में नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और किसानों ने मंडी गेट पर ताला लगा दिया।


अधिकारियों ने समझाने का किया प्रयास, लेकिन नहीं बनी बात

मंडी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों ने बताया कि भावांतर योजना (bhavantar-yojana) में मॉडल रेट 15 दिन की नीलामी के औसत के आधार पर तय किया जाता है, इसलिए इसे तत्काल घोषित करना संभव नहीं है।
हालांकि, किसानों ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब खरीदी शुरू की जा रही है, तो रेट भी पहले से तय होना चाहिए ताकि व्यापारी मनमानी न करें।

“हमारी उपज बिना तय रेट के बिकेगी तो घाटा किसानों का होगा, लाभ व्यापारी का,” — किसान हेमराज मीणा।


मंडी गेट पर ताला, एक घंटे तक ठप रही खरीदी

सुबह करीब 11 बजे किसानों ने सामूहिक रूप से मंडी के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। नीलामी प्रक्रिया रोक दी गई और मंडी परिसर में खरीदी गतिविधियाँ ठप पड़ गईं।

मौके पर मौजूद किसानों ने नारे लगाते हुए कहा कि जब तक शासन स्पष्ट दर घोषित नहीं करता, वे मंडी को नहीं खुलने देंगे। इस दौरान मंडी परिसर में मौजूद व्यापारी और कर्मचारी भी असमंजस की स्थिति में रहे।


एसडीएम के हस्तक्षेप से शांत हुए किसान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सलोनी अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुँचीं। उन्होंने किसानों से बातचीत की और मंडी अधिकारियों के साथ बैठक की। किसानों की मांग पर तत्काल निर्णय लेते हुए उन्होंने शुक्रवार का मॉडल रेट 4000 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने के निर्देश दिए।

“किसानों की भावना का सम्मान करते हुए आज का मॉडल रेट घोषित किया गया है। आगे की प्रक्रिया पारदर्शिता से चलेगी,” — एसडीएम सलोनी अग्रवाल।

मॉडल रेट घोषित होने के बाद किसानों ने ताला खोल दिया और नीलामी प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकी। लगभग एक घंटे तक ठप रही मंडी गतिविधियाँ फिर से बहाल हुईं।


किसानों का आरोप – घोषित रेट से घाटा

हालाँकि, किसानों का असंतोष अभी भी कायम है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि घोषित मॉडल रेट 4000 रुपये प्रति क्विंटल, कृषि मंत्रालय द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5328 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम है। किसानों का कहना है कि इस दर पर उपज बेचने से उन्हें उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही।

“4000 रुपये का रेट हमारे साथ मज़ाक है। जब सरकार एमएसपी 5328 रुपये तय कर चुकी है, तो खरीदी उसी दर पर क्यों नहीं?” — किसान प्रतिनिधि रविंद्र चौहान।


भावांतर योजना के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

भावांतर (bhavantar-yojana)भुगतान योजना के तहत राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज के मॉडल रेट और एमएसपी के अंतर की राशि सीधे उनके खातों में जमा करेगी।
हालांकि, योजना के पहले दिन ही विरोध ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजगढ़, शाजापुर और मंदसौर जिलों से भी किसानों के प्रदर्शन की खबरें आईं, जहाँ मॉडल रेट तय न होने और खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था को लेकर किसान नाराज़ हैं।


किसानों की प्रमुख मांगें

  1. मॉडल रेट की पूर्व घोषणा ताकि खरीदी में पारदर्शिता रहे।
  2. खरीदी प्रक्रिया की निगरानी के लिए किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी।
  3. एमएसपी से नीचे उपज न खरीदी जाए।
  4. नीलामी प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग और रिकॉर्डिंग।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर योजना में सुधार नहीं हुआ, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।


प्रशासन का दावा – प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी

मंडी सचिव ने बताया कि “भावांतर योजना का उद्देश्य किसानों को लाभ देना है। प्रारंभिक दिनों में कुछ तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन इन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि हर दिन के मॉडल रेट की जानकारी मंडी परिसर में और वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी ताकि किसानों को भ्रम न रहे।


पृष्ठभूमि: क्या है भावांतर भुगतान योजना?

भावांतर भुगतान योजना मध्यप्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण किसान सहायता योजना है।
इस योजना के तहत यदि किसान अपनी उपज को बाजार में एमएसपी से कम मूल्य पर बेचते हैं, तो सरकार उस अंतर (भावांतर) की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा करती है।

वर्तमान खरीदी सत्र के लिए योजना की अवधि 24 अक्टूबर से 15 जनवरी तक तय की गई है।
राजगढ़ जिले के सरदारपुर तहसील में करीब 7000 किसानों ने पंजीयन कराया है। शासन के अनुसार, किसानों को खरीदी के 15 दिन के भीतर भुगतान किया जाएगा।


विश्लेषण: पहले दिन का विरोध बड़ा संकेत

भावांतर योजना (bhavantar-yojana) किसानों के लिए राहत का वादा थी, लेकिन इसके पहले ही दिन हुए विरोध ने योजनागत कमियों को उजागर कर दिया। किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मॉडल रेट में पारदर्शिता नहीं है और कई जगह मंडी समितियों में स्थानीय व्यापारी ही रेट तय करने में प्रभाव डाल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रेट निर्धारण की प्रक्रिया किसानों के हित में पारदर्शी नहीं होगी, तब तक ऐसी योजनाओं पर विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा।


किसानों की नाराज़गी प्रशासन के लिए चेतावनी

राजगढ़ मंडी का यह विरोध केवल एक स्थान की घटना नहीं, बल्कि राज्यभर में किसानों के असंतोष की झलक है। भावांतर योजना (bhavantar-yojana) अगर किसानों को राहत नहीं दे पा रही, तो यह उनके विश्वास को कमजोर कर रही है। अब जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की है — वे तय करें कि योजना किसानों के हित में चलेगी या कागज़ों में ही सिमट जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This will close in 0 seconds

error: Content is protected !!