
दीपावली की रौनक गांवों तक नहीं पहुंची, क्योंकि ग्राम पंचायत कंचनपुर के लोग इस बार ‘पानी के बिना दिवाली’ मनाने को मजबूर थे। शुक्रवार की सुबह जल संकट (water crisis) से त्रस्त महिलाओं ने ग्राम पंचायत भवन पहुंचकर ताला जड़ दिया। यह विरोध सिर्फ एक दिन की नाराज़गी नहीं, बल्कि दो महीने से सूखे नलों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ फूटा हुआ आक्रोश है।
दो महीने से सूखी पड़ी नल-जल योजना (water crisis)
ग्राम पंचायत कंचनपुर, जनपद पंचायत शहपुरा में पिछले दो माह से नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है। गांव के नलों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा, जबकि यह योजना ग्रामीण इलाकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि नल-जल योजना की पाइपलाइनें सूख चुकी हैं और हैंडपंप भी खराब पड़े हैं।
“दो महीने से हर दिन उम्मीद करते हैं कि आज पानी आएगा, लेकिन हर दिन निराशा ही मिलती है,” — गांव की महिला सीता बाई ने कहा। पानी की इस समस्या ने न केवल घरेलू कामकाज ठप कर दिए हैं, बल्कि मवेशियों को भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। महिलाएं रोजाना 2 से 3 किलोमीटर दूर से सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोने को मजबूर हैं।
त्योहार पर भी नहीं मिली राहत
दीपावली जैसे बड़े पर्व पर जहां शहरों में बिजली की जगमगाहट थी, वहीं कंचनपुर की गलियों में पानी (water crisis) के लिए हाहाकार मचा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि त्योहार के दिन भी प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली। महिलाएं कहती हैं, “दीपावली पर घरों की सफाई तक नहीं कर पाए। पानी नहीं था तो दीए जलाने का भी मन नहीं हुआ।”
ग्रामीणों ने पंचायत के सचिव और जल विभाग के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं लिया।
महिलाओं ने संभाली मोर्चा: पंचायत भवन में की तालाबंदी
शुक्रवार की सुबह लगभग दर्जनों महिलाएं और ग्रामीण पंचायत भवन पहुंचे और मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया। उन्होंने नारों के साथ प्रदर्शन करते हुए कहा कि जब तक पानी की सप्लाई बहाल नहीं की जाती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
स्थानीय कर्मचारियों को सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा — “पानी चाहिए, वादा नहीं।”
ग्रामीणों का आरोप – जिम्मेदार अधिकारी नदारद
गांव के युवाओं ने बताया कि पिछले साल भी गर्मी के दिनों में यही स्थिति थी, लेकिन तब अस्थायी टैंकरों से कुछ दिन पानी (water crisis) दिया गया था। इस बार प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की।
“हमने पंचायत सचिव और जनपद सीईओ दोनों से शिकायत की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। क्या प्रशासन हमारी प्यास के बुझने का इंतज़ार कर रहा है?” — ग्रामीण रामेश्वर पटेल ने कहा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नल-जल योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से टंकी और पाइपलाइन बनाई गई थी, लेकिन रखरखाव और बिजली बिल के भुगतान में लापरवाही के चलते मोटरें बंद पड़ी हैं।
पेयजल संकट ने बढ़ाई परेशानी
कंचनपुर में जल संकट का असर हर घर पर दिख रहा है। महिलाएं सुबह-सुबह बर्तन लेकर दूर के कुओं या तालाबों की ओर निकल पड़ती हैं। छोटे बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी ढोने में मदद करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि अब कुओं का पानी (water crisis) भी घटने लगा है और कई जगह पर पानी दूषित हो चुका है। लोगों को डर है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो जलजनित बीमारियाँ फैल सकती हैं।
“हमारे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, क्योंकि मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है,” — ग्रामवासी सविता बाई ने कहा।
स्थायी समाधान की मांग
प्रदर्शन कर रही महिलाओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तुरंत नल-जल योजना चालू की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अब केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ दिनों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तो वे जनपद कार्यालय और कलेक्टोरेट का घेराव करेंगे।
प्रशासन की सफाई
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत शहपुरा के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कुछ तकनीकी खराबियों के कारण नल-जल योजना बाधित हुई है। उनका कहना है कि मोटर और पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि “बिजली बिल के भुगतान में देरी और कुछ पाइपलाइन लीकेज की वजह से सप्लाई रुकी थी। अब जल्द ही काम पूरा कर पानी बहाल कर दिया जाएगा।” हालाँकि, ग्रामीणों को इस पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी बातें वे पिछले कई महीनों से सुन रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला।
गांव की जल समस्या बना व्यापक मुद्दा
कंचनपुर का यह संकट (water crisis) केवल एक गांव की कहानी नहीं है। नर्मदापुरम जिले के कई ग्रामीण इलाकों में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। नल-जल योजनाएँ अधूरी हैं या बंद पड़ी हैं। कई जगह टंकियों में पानी है, लेकिन बिजली बिल या मोटर खराब होने के कारण सप्लाई नहीं हो पा रही।
जल विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने से योजनाएँ असफल हो रही हैं।
‘पानी ही जीवन है’ का नारा अब पुकार बन गया
ग्राम पंचायत कंचनपुर के लोग अब प्रशासन से नहीं, बल्कि अपने अधिकार से पानी मांग रहे हैं। उनकी मांग सीधी है — “पानी चाहिए, राजनीति नहीं।”
दो महीने से जल संकट (water crisis) झेल रहे ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार और प्रशासन उनकी पुकार सुनेगा, ताकि अगली दिवाली खुशियों के साथ मनाई जा सके — न कि खाली बर्तनों की खनक के साथ।