
मऊगंज। जिले के हन्नाचौर गांव का 25 वर्षीय विकास साकेत पिछले एक सप्ताह से लापता (missing) है। परिवारजन उसकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिजनों ने मऊगंज पुलिस पर गंभीर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो शायद विकास को खोजा जा सकता था।
बुधवार शाम लापता(missing) युवक की मां गीता साकेत दर्जनों ग्रामीणों के साथ मऊगंज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचीं और वहां न्याय की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस ने न केवल मामले को गंभीरता से नहीं लिया, बल्कि रिपोर्ट दर्ज करने में भी लापरवाही और देरी की।
15 अक्टूबर से लापता(missing) है विकास साकेत
मिली जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर की शाम विकास साकेत मजदूरी करके अपने घर लौट रहा था। रास्ते में वह पन्नी गांव के मकरंद विद्यालय के पास अपने साथी मनोज साकेत के साथ ठेले पर बैठकर अंडे खा रहा था। उसी दौरान गांव का ही एक व्यक्ति धर्मराज मिश्रा वहाँ पहुंचा और बिना किसी कारण गाली-गलौज करते हुए विकास पर हमला करने लगा।
मनोज साकेत के अनुसार, “धर्मराज ने अचानक झगड़ा शुरू कर दिया। जब हमने बीच-बचाव की कोशिश की तो दो अन्य लोग भी वहां आ गए। उन्होंने विकास को पकड़ लिया और मारपीट शुरू कर दी। मैं किसी तरह वहां से भाग निकला और घरवालों को सूचना दी।”
मां गीता साकेत ने बताई दर्दनाक दास्तान
विकास की मां गीता साकेत ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचीं, लेकिन वहां उनका बेटा नहीं था। उन्होंने आसपास के खेतों, नालों और गांव के रास्तों में खोजबीन की, लेकिन कोई पता नहीं चला।
“हमने उसी रात मऊगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गए, लेकिन पुलिस ने हमारी बातों को नजरअंदाज किया। कई बार आग्रह करने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिसकर्मियों ने कहा कि ‘लड़का खुद चला गया होगा’। यह सुनकर दिल टूट गया,” गीता साकेत ने कहा।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में बरती ढिलाई
गीता साकेत का आरोप है कि उन्होंने 18 अक्टूबर को कई बार गुहार लगाने के बाद जाकर रिपोर्ट की प्रति प्राप्त की। तब तक पुलिस ने न तो घटनास्थल का निरीक्षण किया था और न ही संदिग्धों से पूछताछ की।
उनका कहना है कि अगर शुरू में ही जांच तेज़ी से शुरू की जाती, तो शायद उनके बेटे का कुछ पता चल जाता। “हम रोज़ थाना जाते हैं, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि जांच जारी है। हमें बस इंतज़ार का आश्वासन दिया जा रहा है,” गीता ने कहा।
घटना के बाद से मोबाइल फोन स्विच ऑफ
परिवार ने बताया कि घटना वाले दिन से ही विकास का मोबाइल फोन बंद है। फोन की अंतिम लोकेशन भी पुलिस ने अब तक साझा नहीं की है। इससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि कहीं विकास के साथ कोई अनहोनी न हो गई हो।
“विकास मेहनतकश और सरल स्वभाव का लड़का था। वह मजदूरी करके परिवार का पेट पालता था। उसके गायब(missing) होने के बाद घर में खाना भी नहीं बन रहा। मां गीता दिन-रात रो रही है,” एक रिश्तेदार ने बताया।
गांव में तनाव, ग्रामीणों ने मांगा न्याय
विकास के लापता (missing) होने के बाद से हन्नाचौर गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ने शुरुआती 48 घंटे में सर्च अभियान चलाया होता तो शायद युवक मिल जाता। बुधवार को दर्जनों ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि धर्मराज मिश्रा और उसके साथियों से तुरंत पूछताछ की जाए और लापता (missing) युवक को ढूंढने के लिए विशेष टीम गठित की जाए।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
मऊगंज पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में है और खोज अभियान जारी है। पुलिस ने विकास की तलाश के लिए आसपास के गांवों और संभावित ठिकानों पर टीम भेजी है। एक अधिकारी ने कहा, “हमने मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने के लिए तकनीकी सेल को जानकारी दी है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
हालांकि, परिजनों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल कागजों पर हो रही है। जमीनी स्तर पर पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
ग्रामीणों ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि धर्मराज मिश्रा स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति है, इसलिए पुलिस उस पर कार्रवाई से बच रही है।हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।ग्रामीणों ने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला, तो वे रीवा कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक ज्ञापन सौंपेंगे।
परिवार की व्यथा और समाज की चिंता
विकास साकेत के परिवार की हालत बेहद खराब है। मां गीता साकेत का कहना है कि “मुझे बस मेरे बेटे की खबर चाहिए, चाहे वो जिंदा हो या उसकी कोई निशानी ही मिले।”उनकी यह बात सुनकर कई ग्रामीण भावुक हो गए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यह मामला ग्रामीण पुलिसिंग की नाकामी का उदाहरण है। यदि कोई गरीब परिवार न्याय की मांग करता है, तो उसे दर-दर भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में FIR दर्ज करने में देरी करना कानूनन अपराध है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
एक सप्ताह से लापता(missing) विकास साकेत का मामला अब सामाजिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो आम नागरिक को न्याय दिलाने में बार-बार असफल होती दिखती है।
लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पुलिस और प्रशासन जल्द से जल्द विकास साकेत का पता लगाए और दोषियों को सख्त सजा दिलाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हन्नाचौर गांव की हर मां, गीता साकेत की तरह, अपने बेटे की तस्वीर लेकर न्याय की गुहार लगाती रहेगी।