नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव (bihar election) 2025 को लेकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच सीट बंटवारे पर चल रही लंबी खींचतान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों दलों के शीर्ष नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की सोमवार को दिल्ली में होने वाली बैठक में इस मसले पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सीट बंटवारे पर जारी गतिरोध
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और आरजेडी के बीच पिछले कई दिनों से सीटों के बंटवारे को लेकर गहन चर्चा चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। कांग्रेस चाहती है कि उसे बिहार (bihar election) में कम से कम 60 सीटें दी जाएं, जबकि आरजेडी इसे घटाकर करीब 45 से 50 सीटों तक सीमित रखने के पक्ष में है।
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी अब गठबंधन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए अपनी मांग में थोड़ी लचीलापन दिखा रही है। हालांकि, आरजेडी का मानना है कि वह राज्य में प्रमुख विपक्षी दल है और पिछली बार की तुलना में इस बार कांग्रेस को कम सीटों से संतुष्ट होना चाहिए।
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की (bihar election 2025) अहम मुलाकात
रविवार को दोनों दलों के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचे। सोमवार को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मुलाकात तय है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भी शामिल होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि खड़गे ने पहले ही तेजस्वी यादव से फोन पर बात की है और गठबंधन को एकजुट रखने पर जोर दिया है।
कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और महासचिव सुशील पासी ने कहा कि पार्टी का उच्च नेतृत्व अब इस मामले पर अंतिम फैसला लेगा। उनके अनुसार, “सारी तैयारी पूरी कर ली गई है, बस उच्च कमान को निर्णय लेना है।”
तेजस्वी यादव दिल्ली में, परिवार के साथ रणनीति पर मंथन
तेजस्वी यादव इन दिनों दिल्ली में अपने माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के साथ मौजूद हैं। माना जा रहा है कि तेजस्वी ने बिहार चुनाव ( bihar election) की रणनीति को लेकर अपने पिता से गहन चर्चा की है। आरजेडी अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सीट बंटवारे के बाद गठबंधन में किसी तरह की नाराजगी या टूट-फूट की स्थिति न बने।
तेजस्वी यादव की रणनीति स्पष्ट है — वह चाहते हैं कि राजद को गठबंधन (bihar election) में प्रमुख स्थान मिले और कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दल उनकी नेतृत्व क्षमता को स्वीकार करें।
वीआईपी पार्टी को लेकर नई उलझन
इस बीच, तेजस्वी यादव अपने सहयोगी मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को भी गठबंधन में बनाए रखना चाहते हैं। सहनी ने हाल ही में 60 सीटों और उपमुख्यमंत्री पद की मांग रखकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
कांग्रेस ने इस पर स्पष्ट कहा कि “वीआईपी को संभालना राजद की जिम्मेदारी है।” पार्टी का तर्क है कि वह सीधे तौर पर केवल राजद के साथ तालमेल कर रही है, और छोटे सहयोगियों के मसले पर राजद को नेतृत्व करना चाहिए।
एनडीए के खिलाफ साझा मोर्चा
राजद और कांग्रेस दोनों को उम्मीद है कि बिहार bihar election) में एनडीए सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी माहौल बन चुका है, जिसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिल सकता है। राजद का मानना है कि अगर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव साझा जनयात्रा निकालते हैं, तो यह गठबंधन की एकता और जनसमर्थन दोनों को मजबूत करेगी।
राजद के वरिष्ठ नेताओं ने सुझाव दिया है कि तेजस्वी यादव को गठबंधन का “मुख्यमंत्री चेहरा” घोषित किया जाए, ताकि जनता के बीच स्पष्ट संदेश जाए कि विपक्ष एकजुट है और उसके पास स्पष्ट नेतृत्व है।
कांग्रेस का पलटवार: बिहार (bihar election) में मजबूत उपस्थिति
वहीं, कांग्रेस का दावा है कि बिहार के कई जिलों में उसका पारंपरिक वोट बैंक अब भी मजबूत है। पार्टी का कहना है कि वह न सिर्फ एनडीए की नीतिगत विफलताओं को मुद्दा बनाएगी, बल्कि रोज़गार, शिक्षा, और महंगाई जैसे मसलों पर जनता के बीच जाएगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “गठबंधन का सीट बंटवारा जल्द तय होगा और कांग्रेस अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। हमारा लक्ष्य बिहार (bihar election) में एनडीए सरकार की नीतिगत असफलताओं को उजागर करना और जनता को विकल्प देना है।”
बिहार की राजनीतिक समीकरण में बदलाव के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बिहार (bihar election) में मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को लेकर जनता में असंतोष के संकेत हैं, जबकि बीजेपी की आंतरिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-लेफ्ट) समय रहते एकजुट होकर अभियान चलाए, तो यह एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की संयुक्त रैलियाँ युवाओं और नए मतदाताओं को आकर्षित कर सकती हैं। खासकर रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर दोनों नेताओं की समान सोच गठबंधन के लिए फायदेमंद हो सकती है।
सीट बंटवारे का फार्मूला: कौन कहां मजबूत
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने जिन सीटों की मांग की है, उनमें से अधिकांश सीवान, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, चंपारण और गया जैसे इलाके शामिल हैं, जहां पार्टी पारंपरिक रूप से मजबूत रही है।
वहीं, आरजेडी ने अपनी नजरें मधुबनी, समस्तीपुर, सारण, पटना, और जहानाबाद जैसी सीटों पर टिकाई हैं। इन क्षेत्रों में पार्टी का संगठन मजबूत है और पिछली बार भी उसे अच्छा प्रदर्शन मिला था।
सोमवार की बैठक पर सबकी निगाहें
अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। अगर बैठक में कोई ठोस सहमति बन जाती है, तो अगले कुछ दिनों में गठबंधन की औपचारिक घोषणा और सीटों की सूची भी जारी की जा सकती है।
कांग्रेस और राजद दोनों ही इस बात से वाकिफ हैं कि देरी से फैसला लेने पर जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल सकता है। यही वजह है कि दोनों दल अब किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं।
बिहार चुनाव (bihar election) 2025 से पहले कांग्रेस-राजद गठबंधन का यह सीट बंटवारा न केवल दोनों दलों के लिए बल्कि पूरे महागठबंधन के भविष्य के लिए अहम साबित होगा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की बैठक से यह तय होगा कि विपक्ष कितनी मजबूती से एनडीए के खिलाफ मोर्चा खोल पाएगा।
अगर दोनों दलों के बीच सहमति बन जाती है, तो बिहार (bihar election) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर मतभेद जारी रहे, तो विपक्षी एकता पर सवाल उठना तय है।
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