भारत में रविवार, 21 सितंबर 2025 की शाम राजनीतिक और कूटनीतिक सरगर्मियों से भरी रही। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm Modi) शाम 5 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि उनके संबोधन का विषय गुप्त रखा गया। इस अस्पष्टता ने न केवल जनता की जिज्ञासा बढ़ाई, बल्कि विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, को भी केंद्र सरकार पर तंज कसने का अवसर दिया।

पीएमओ की घोषणा और समय का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी (pm Modi) का संबोधन ऐसे समय पर तय हुआ जब देश में नवरात्रि की पूर्व संध्या थी। ठीक इसी दिन से संशोधित जीएसटी दरें लागू हो रही थीं, जिनसे कई उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम होनी थीं। सरकार चाहती थी कि जीएसटी में कटौती का लाभ लोगों तक तुरंत पहुंचे और इसे एक “राहत पैकेज” की तरह देखा जाए।
हालाँकि, पीएमओ ने संबोधन के विषय पर चुप्पी साधे रखी। यही कारण था कि मीडिया और विपक्ष ने कयास लगाने शुरू कर दिए—क्या मोदी केवल नए जीएसटी दरों का दोहराव करेंगे, या फिर अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े ताजा विवादों पर भी बोलेंगे?
कांग्रेस का तंज और जयराम रमेश का बयान
कांग्रेस ने इस मौके पर तीखा हमला बोला। पार्टी के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा:
“जैसे ही पीएम राष्ट्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं, उनके अच्छे मित्र वाशिंगटन डी.सी. में फिर से उनकी चमक चुरा लेते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 42वीं बार दावा किया है कि उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार का leverage इस्तेमाल करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को रोका।”
रमेश ने व्यंग्य करते हुए सवाल उठाए—क्या मोदी ट्रंप के इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया देंगे? क्या वह लाखों भारतीय H-1B वीज़ा धारकों की चिंताओं को संबोधित करेंगे, जिन पर अचानक शुल्क बढ़ोतरी का असर पड़ा है? या फिर केवल नए जीएसटी दरों की जानकारी देंगे, जो पहले से ही सबको पता है?
ट्रंप का दावा और भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कुछ महीनों में बार-बार दावा किया है कि मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम में उनकी भूमिका थी। उनका कहना है कि उन्होंने बढ़ते अमेरिका-भारत व्यापार का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया और इस तरह संघर्ष को रोका।
- 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे।
- इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर हमला करना था।
- इसके बाद 10 मई तक भारत और पाकिस्तान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले चले।
- 10 मई की रात दोनों देशों ने संघर्ष विराम पर सहमति जताई।
भारत का आधिकारिक रुख हमेशा से यही रहा है कि यह सीज़फायर दोनों देशों के सैन्य संचालन निदेशकों (DGMO) के बीच सीधे संवाद का नतीजा था। लेकिन ट्रंप लगातार इसे अपनी “कूटनीतिक उपलब्धि” बताते रहे हैं। उन्होंने कई मंचों पर दावा किया कि उन्होंने “सात युद्धों को समाप्त करने” में भूमिका निभाई है और इसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
कांग्रेस का सवाल: “क्या मोदी(pm modi) ट्रंप को जवाब देंगे?”
कांग्रेस का आरोप है कि मोदी (pm Modi) सरकार अमेरिका की दखलअंदाजी पर चुप रहती है। जयराम रमेश ने कहा कि ट्रंप ने न केवल अमेरिका में, बल्कि सऊदी अरब, कतर और यूके में भी यही दावा दोहराया है। विपक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस मुद्दे पर देश को स्पष्ट करना चाहिए कि भारत की विदेश नीति में तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं है।
H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी का विवाद
मोदी (pm Modi) के संबोधन से ठीक पहले एक और बड़ा मुद्दा सामने आया—H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी।
- ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की कि नए H-1B वीज़ा याचिकाओं के लिए 100,000 डॉलर का एकमुश्त शुल्क देना होगा।
- यह शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, मौजूदा वीज़ा धारकों को इससे छूट दी गई है।
- हालांकि, यह कदम अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए गहरी चिंता का कारण बना।
कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या मोदी अपने संबोधन में भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के इस संकट पर कोई ठोस आश्वासन देंगे?
जीएसटी दरों में कटौती – सरकार का बड़ा कदम
इन अंतरराष्ट्रीय विवादों के बीच, मोदी (Pm Modi) सरकार घरेलू स्तर पर जीएसटी दरों में कटौती को एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहती है।
- 22 सितंबर से नई दरें लागू होंगी।
- कई उपभोक्ता वस्तुएं और सेवाएँ सस्ती होंगी, जिससे त्योहारों के मौसम में लोगों को राहत मिलेगी।
- सरकार का मानना है कि यह कदम महँगाई पर काबू पाने और उपभोग बढ़ाने में मदद करेगा।
हालाँकि, कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम “हताशा” में उठाया गया है और इसका फायदा सीमित होगा।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी (pm modi)-ट्रंप समीकरण
मोदी और ट्रंप की व्यक्तिगत “दोस्ती” लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे की तारीफ की है। लेकिन मौजूदा हालात में यह रिश्ता भारतीय राजनीति में आलोचना का केंद्र बन गया है।
- ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का श्रेय लेने से विपक्ष को मोदी पर हमला करने का अवसर मिला।
- एच-1बी वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी से भारतीय आईटी सेक्टर पर गहरा असर पड़ सकता है, जो मोदी सरकार के लिए चुनौती है।
- दूसरी ओर, मोदी सरकार अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार और निवेश को अपनी सफलता बताती रही है।
विपक्ष बनाम सरकार – जनता की नजरें
जनता की निगाहें इस पर टिकी थीं कि प्रधानमंत्री (Pm Modi) अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बोलेंगे।
- क्या वह ट्रंप के दावों को खारिज करेंगे और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देंगे?
- क्या वह H-1B वीज़ा संकट से जूझ रहे भारतीयों के लिए कोई ठोस आश्वासन देंगे?
- या फिर संबोधन केवल जीएसटी दरों की जानकारी और त्योहारों की शुभकामनाओं तक सीमित रहेगा?
कांग्रेस का कहना है कि मोदी को इन “गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों” पर चुप्पी तोड़नी चाहिए, वरना यह संदेश जाएगा कि सरकार अमेरिकी दबाव में है।
21 सितंबर 2025 का दिन भारतीय राजनीति और कूटनीति दोनों के लिए अहम साबित हुआ। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी (Pm Modi) का राष्ट्र को संबोधन उत्सुकता का विषय बना, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। राष्ट्रपति ट्रंप के दावे, एच-1बी वीज़ा विवाद और जीएसटी दरों में बदलाव—इन सबके बीच मोदी का संबोधन केवल नीतिगत घोषणा भर नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक और राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का असली श्रेय किसे जाता है, इस पर बहस लंबे समय तक जारी रह सकती है। लेकिन इतना साफ है कि विपक्ष मोदी से जवाब मांग रहा है, जनता आश्वासन चाहती है और वैश्विक मंच पर भारत की छवि दांव पर है। ऐसे में प्रधानमंत्री का हर शब्द न केवल घरेलू राजनीति बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डालने वाला होगा।