Inspiring Swachh Bharat Mission Swachhotsav: नसीराबाद ढाना के नर्मदा तट पर ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास

माखननगर जनपद क्षेत्र के ग्राम नसीराबाद ढाना में पवित्र नर्मदा तट पर शनिवार को एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। जहां सामान्य दिनों में ग्रामीण अपनी दैनिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, वहीं इस दिन सबने एकजुट होकर स्वच्छता के महाअभियान में हिस्सा लिया। यह आयोजन स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत, जन अभियान परिषद तथा ग्राम पंचायत नसीराबाद के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
स्वच्छता का पर्व बना “स्वच्छोत्सव”
इस अवसर को ग्रामीणों ने केवल साफ-सफाई की गतिविधि तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे “स्वच्छोत्सव” का रूप दिया। सुबह से ही ग्रामीणों का उत्साह देखने लायक था। हाथों में झाड़ू, फावड़े और टोकनियाँ लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, महिलाएँ, युवा और पंचायत प्रतिनिधि नर्मदा तट की ओर पहुँचे। वहां फैली गंदगी, प्लास्टिक, पॉलिथिन व अन्य कचरे को मिल-जुलकर हटाया गया।
नर्मदा नदी को लेकर ग्रामीणों की भावनाएँ अत्यंत गहरी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि नर्मदा केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी माता हैं, और उनकी स्वच्छता सबकी जिम्मेदारी है। यही कारण रहा कि लोगों ने इसे केवल सरकारी योजना न मानकर अपने सामाजिक-धार्मिक कर्तव्य के रूप में स्वच्छ भारत मिशन को अपनाया।
जन अभियान परिषद की भूमिका
इस पूरे अभियान में जन अभियान परिषद ने अहम भूमिका निभाई। परिषद के सदस्यों ने पूर्व में ही ग्रामवासियों के बीच जाकर स्वच्छता का संदेश दिया था और सभी को इस श्रमदान में भागीदारी के लिए प्रेरित किया था। परिषद का उद्देश्य था कि ग्रामीण स्वयं अपनी जिम्मेदारी समझें और इस तरह के आयोजन केवल प्रतीकात्मक न रहकर नियमित आदत बनें।
कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि “स्वच्छ भारत मिशन” केवल सरकारी योजना भर नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा विषय है। जब तक लोग स्वयं आगे बढ़कर सहयोग नहीं करेंगे, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं है।
पंचायत व ग्रामीणों की सहभागिता
ग्राम पंचायत नसीराबाद ने इस अभियान को सफल बनाने में पूरा सहयोग किया। पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ-सफाई के लिए उपकरण, गाड़ियों और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। वहीं ग्रामीणों ने पूरे जोश और उत्साह से श्रमदान किया। इस अवसर पर महिलाएँ भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने न केवल सफाई कार्य में सक्रिय भागीदारी की, बल्कि बच्चों को भी स्वच्छता का महत्व समझाया।
ग्रामीणों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे आगे से नर्मदा तट और गाँव में गंदगी नहीं फैलाएँगे। साथ ही उन्होंने यह भी निश्चय किया कि समय-समय पर सामूहिक श्रमदान कर गांव को साफ-सुथरा बनाएंगे।
स्वच्छता और जनजागरण का संगम
अभियान के दौरान केवल सफाई ही नहीं हुई, बल्कि जनजागरण की दिशा में भी प्रयास किए गए। परिषद के सदस्यों ने ग्रामीणों को समझाया कि पॉलिथिन और प्लास्टिक का प्रयोग न करें, क्योंकि यह नदी और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा कि यदि हर परिवार अपने आस-पास साफ-सफाई पर ध्यान देगा तो गांव और नर्मदा तट हमेशा स्वच्छ रहेंगे।
ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि स्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य से है। गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियाँ फैलती हैं, जबकि स्वच्छ वातावरण में लोग स्वस्थ रहते हैं। इस संदेश ने लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी।
उत्साह और एकता की मिसाल
इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही ग्रामीणों की एकता और उत्साह। किसी ने इसे केवल पंचायत या परिषद का कार्यक्रम नहीं माना, बल्कि सबने इसे अपनी जिम्मेदारी के रूप स्वच्छ भारत मिशन को लिया। छोटे-बड़े सभी लोग हाथों में झाड़ू लेकर काम में जुट गए। यह नजारा अपने आप में अद्भुत और प्रेरणादायी था।
आगे की दिशा
स्वच्छोत्सव के समापन पर ग्रामीणों ने भविष्य की रूपरेखा भी तय की। यह निर्णय लिया गया कि हर महीने एक बार सामूहिक श्रमदान किया जाएगा। पंचायत स्तर पर स्वच्छता प्रहरी दल बनाया जाएगा, जो लोगों को गंदगी न फैलाने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही बच्चों को विद्यालय स्तर पर स्वच्छता अभियान से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया गया।
ग्राम नसीराबाद ढाना में आयोजित यह स्वच्छोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण चेतना और जनसहभागिता का प्रतीक बन गया। जिस तरह से ग्रामीणों ने नर्मदा तट की सफाई कर पर्यावरण और नदी संरक्षण का संदेश दिया, वह अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण है।
यह आयोजन साबित करता है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो स्वच्छ भारत मिशन वास्तव में सफल हो सकता है। नर्मदा तट पर मनाया गया यह स्वच्छोत्सव आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश है कि हमारी नदियाँ और गाँव तभी सुंदर रहेंगे जब हम सब मिलकर उनकी स्वच्छता की जिम्मेदारी उठाएँगे।