कोविड-19 के बाद हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा, जानें रिपोर्ट में क्या चेतावनी

कोरोना के कारण लाखों लोगों के हार्ट पर मंडरा रहा खतरा, सही से एहतियात नहीं
Covid-19 Put your heart at Risk: करीब पाँच साल पहले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। महामारी थम चुकी है, लेकिन कोविड-19 के दुष्प्रभाव अब भी लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहे हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लाखों मरीजों के सामने सबसे बड़ा खतरा है—हार्ट अटैक

यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट ने चेताया है कि कोविड संक्रमण दिल और रक्त वाहिकाओं पर स्थायी नुकसान छोड़ सकता है।


कोविड और दिल पर हार्ट अटैक का असर

  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ा खतरा – कोविड संक्रमण के बाद खून में थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।

  • कार्डियक फंक्शन पर असर – वायरस न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि दिल और ब्लड वैसल्स को भी नुकसान पहुंचाता है।

  • लक्षण – सांस फूलना, सीने में दर्द, अनियमित धड़कनें और अत्यधिक थकान।

  • हाई-रिस्क ग्रुप – पहले से हृदय रोगी और बुजुर्ग लोग।


लॉन्ग कोविड और दिल की जटिलताएँ हार्ट अटैक   

लॉन्ग कोविड वाले मरीजों में “कार्डियक लॉन्ग कोविड” के लक्षण प्रमुख हैं:

  • सीने में दर्द

  • सांस लेने में कठिनाई

  • अनियमित दिल की धड़कन

  • लगातार थकान और चक्कर

  • ऑटोनॉमिक डिसफंक्शन – यानी शरीर की नसों का सही से काम न करना, जो दिल की धड़कन, सांस और तापमान को नियंत्रित करती हैं।


शोध में सुझाए गए उपाय

शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर सही कदम समय रहते उठाए जाएँ तो दिल पर कोविड का खतरा कम किया जा सकता है।

  1. वैक्सीनेशन जारी रहे – पूरी तरह वैक्सीन लेने वालों में गंभीर हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

  2. समय पर पहचान और इलाज – संदिग्ध मरीजों की शुरुआती जांच ज़रूरी है।

  3. कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम

    • विशेष फिजियोथेरेपी

    • पोषण और देखभाल

    • दिल को मज़बूत बनाने वाले एक्सरसाइज़

    • नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग

  4. समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच – हर वर्ग तक इन सेवाओं को पहुँचाना ज़रूरी है।

कोविड-19 का असर केवल महामारी के दौरान नहीं रहा, बल्कि यह लॉन्ग कोविड के रूप में आज भी लाखों मरीजों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है। दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए जरूरी है कि वैक्सीनेशन, समय पर पहचान, और विशेष कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम को प्राथमिकता दी जाए।
यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में पब्लिक हेल्थ सिस्टम की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

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