एयर इंडिया का उद्देश्य अपने पुराने बेड़े में परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाना और यात्रियों को विश्व स्तरीय उड़ान अनुभव प्रदान करना है। सरकारी स्वामित्व के दौरान वित्तीय संकट झेलने के कारण वर्षों तक इन विमानों के केबिन में बड़े पैमाने पर रखरखाव नहीं हो सका था, जिससे लंबी दूरी की उड़ानों पर यात्रियों को असुविधा होती रही।
एयरलाइन ने बताया कि उसने अपने पुराने B787-8 ड्रीमलाइनर विमानों के लिए रेट्रोफिट कार्यक्रम शुरू कर दिया है। 26 विमानों में से पहला विमान (VT-ANT) जुलाई में कैलिफ़ोर्निया के विक्टरविले स्थित बोइंग सुविधा के लिए रवाना हुआ है, जबकि दूसरा विमान अक्टूबर में वहां भेजा जाएगा। दोनों विमानों के दिसंबर में सेवा में लौटने की उम्मीद है।
रेट्रोफिट कार्यक्रम के तहत इन विमानों में तीन-श्रेणी विन्यास वाला बिल्कुल नया इंटीरियर, एवियोनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों का उन्नयन किया जाएगा, ताकि परिचालन संबंधी व्यवधान कम हो सकें। सात विमानों का वहीं पर भारी, निर्धारित डी-चेक रखरखाव भी होगा।
B787-8 विमानों का उन्नयन कार्यक्रम 2027 के मध्य तक पूरा करने की योजना है। इसके बाद पुराने बोइंग 777-300ER विमानों के रेट्रोफिट का काम शुरू होगा, जिसे अक्टूबर 2028 तक समाप्त करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, 27 पुराने नैरोबॉडी A320neo विमानों के रेट्रोफिट का काम सितंबर 2024 में शुरू हो चुका है।
इस देरी के बावजूद, एयर इंडिया का दावा है कि उन्नयन के बाद यात्रियों को लंबे रूट्स पर एक बिल्कुल नया केबिन अनुभव मिलेगा और तकनीकी गड़बड़ियों की संभावना कम हो जाएगी