गोदाम में 9,899 बोरियां गायब, रिकॉर्ड में हेराफेरी साफ, फिर भी पुलिस ने दर्ज नहीं किया केस

खाली बोरियां और मिलावटी माल मिलने के बावजूद पुलिस कार्रवाई से बचती नजर

वेयरहाउस में जांच  टीम

चौलाचोन स्थित एकलव्य वेयरहाउस में करोड़ों रुपये की मूंग गायब होने के मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की जांच टीम ने भले ही 9,899 बोरियां मूंग गायब होने का खुलासा कर दिया हो, लेकिन देर रात तक इस मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की जा सकी। गायब मूंग की कीमत लगभग 4 करोड़ 22 हजार रुपये आंकी गई है।

खाली बोरियां और मिलावटी माल भी बरामद

जांच के दौरान टीम ने गोदाम में मिट्टी और रेत मिली नॉन-फेयर एवरेज क्वालिटी (नॉन-एफएक्यू) मूंग के साथ-साथ कई खाली बोरियां भी बरामद की हैं। यह स्थिति साफ संकेत दे रही है कि रिकॉर्ड में दर्ज माल और वास्तविक स्टॉक में भारी गड़बड़ी है। सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों में हेराफेरी कर मूंग की निकासी की गई और उसके बदले खाली बोरियां और मिलावटी माल रख दिया गया।

खाली बोरियों का स्टॉक



क्यों नहीं दर्ज हुई एफआईआर?

सवाल यह उठता है कि जब इतनी बड़ी अनियमितता सामने आ चुकी है, तो अब तक प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई? जानकारों का मानना है कि या तो प्रशासन उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार कर रहा है या फिर आरोपियों को बचाने की मंशा से कार्रवाई में देरी की जा रही है।

जांच टीम का गठन, रिपोर्ट सौंपी गई

बता दें कि वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने मामले की जांच के लिए कृषि विभाग, विपणन संघ और जिला प्रशासन के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक पांच सदस्यीय टीम का गठन किया था। टीम ने गोदाम में मौजूद भौतिक स्टॉक का स्टॉक रजिस्टर, परिवहन चालान, गुणवत्ता प्रमाणपत्र और आवक-जावक के सभी अभिलेखों से बारीकी से मिलान किया। जांच में दस्तावेजी रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण के बीच भारी अंतर पाए जाने पर टीम ने विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया है।

अन्य गोदामों की भी होगी जांच

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वेयरहाउस के शाखा प्रबंधक की शिकायत के आधार पर अब जिले के अन्य गोदामों की भी जांच कराई जाएगी। प्रशासन का रुख केवल एक गोदाम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भंडारण तंत्र की पारदर्शिता की गहन पड़ताल की जाएगी। यदि अन्य स्थानों पर भी अनियमितताएं पाई गईं तो व्यापक स्तर पर कार्रवाई होने की संभावना है।


देनवापोस्ट इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या प्रशासन किसी बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश होने से डर रहा है? हम इस मामले में होने वाली हर गतिविधि की पड़ताल करते रहेंगे और अपने पाठकों को जल्द ही अगली अपडेट देंगे।

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